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कालातीत जीवन कौशल

हमारी औपचारिक शिक्षा अक्सर एक GPS की तरह काम करती है जो सीखनेवाले को एक बँधी-बँधाई दुनिया में कदम-कदम पर रास्ता बताती हुई चलती है. १९वीं और २०वीं सदी में GPS तरह की शिक्षा ठीक-ठाक काम कर गयी. विश्वविद्यालय की डिग्री के रूप में आप किसी एक क्षेत्र में ज्ञान का भंडार जमा कर लेते और क्योंकि उस समय अधिकतर क्षेत्रों में ज्ञान में वृद्धि की दर बहुत कम थी, यह शिक्षा किसी व्यवसाय या रोज़गार में आजीवन सफलता के लिए पर्याप्त होती.

पर २१वीं सदी में हालात बहुत तेज़ी से बदल रहे हैं. हर क्षेत्र में ज्ञान का विस्फोट हो रहा है और इससे हर क्षण शिक्षा का नक्शा बदल रहा है. ऐसे में ‘निर्धारित पाठ्यक्रम’ वाली शिक्षा काफी नहीं है. मामले को और पेचीदा बनाने के लिए रोबॉट मनुष्य के बाहुबल पर निर्भर रोजगार को प्रतिस्थापित कर रहे हैं, नैनो-मशीने हाथ के हुनर वाले व्यवसायों को और आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस मनुष्य के बुद्धिबल पर बने उद्यम को.

आज के छात्रों को कल व्यवसाय या रोज़गार के लिए अन्य मानवों से तो मुकाबला करना ही पड़ेगा, उनको बुद्धिमान मशीनों से भी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ेगी. ऐसे में सफलता के लिए युवाओं को कुछ अलग जीवन कौशल में निपुणता की आवश्यकता है… कालातीत जीवन कौशल…